धार्मिक नगरी की परंपराओं पर कोरोना का साया, मंदिरों में हो रही पूजा अर्चना
उज्जैन आज फूलडोल ग्यारस है प्रतिवर्ष आज के दिन बेरवा समाज द्वारा परंपरागत रूप से फूलडोल चल समारोह निकाला जाता है कोरोना संक्रमण के चलते 105 साल बाद यह पहला मौका है जब शहर के मार्गों पर फूलडोल चल समारोह की रौनक दिखाई नहीं देगी समाज जनों द्वारा किशनपुरा स्थित मंदिर में पूजा अर्चना कर डोल ठंडे करने की परंपरा को पूरा किया जाएगा
पूरी दुनिया में कोविड-19 के चलते संक्रमण फैला हुआ है बीमारी वैश्विक स्तर का रूप धारण कर चुकी है धार्मिक नगरी में तीज त्योहारों की परंपरा पर कोरोना का साया हुआ है जिला प्रशासन ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर होने वाले सभी आयोजनों को प्रतिबंधित कर रखा है जिसके चलते बैरवा समाज द्वारा आज निकाले जाने वाले फूलडोल चल समारोह को भी स्थगित कर दिया गया है बैरवा समाज महापंचायत अध्यक्ष एवं पंचो में डोल समिति प्रमुख सुनील कुमार गोठवाल ने बताया की 105 वर्षों बाद यह पहला मौका है जब फूलडोल चल समारोह की झिलमिलाती झांकियों का कारवां शहर के मार्गों पर दिखाई नहीं देगा जिला प्रशासन के साथ हुई समाज जनों की बैठक के बाद किशनपुरा स्थित श्री राम कृष्ण मंदिर में ही पूजा अर्चना करनेे का निर्णय लिया गया है आज सुबह 11 बजे समाज के वरिष्ठ एवं महानुभाव द्वारा आरती कर मंदिर प्रांगण
में डोल समाज जनों के दर्शन के लिए रखे गए हैं शाम 7 बजे सोलह सागर के जल से भगवान का स्नान कराया जाएगा और आरती के बाद भगवान को वापस अपने स्थान पर विराजमान किया जाएगा डोल दर्शन के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है समाज के वरिष्ठजनों, अखाड़ा प्रमुख और उस्तादों का सम्मान कार्यक्रम भी मंदिर प्रांगण में ही किया जाएगा रात्रि जागरण एवं सत्संग का आयोजन किया गया है
24 मोहल्लों की 20 झांकियों का निकलता हैै कारवां
फूलडोल चल समारोह को लेकर बेरवा समाज के २४ मोहल्लों से २० झांकियों का कारवां प्रतिवर्ष शहर के मार्गों से निकाला जाता है किशनपुरा स्थित मंदिर से डोल उठने के बाद झिलमिलाती झांकियों की शुरुआत तीन बत्ती चौराहा से होती है टावर चौक पर समाज जनों का सम्मान किया जाता है रात भर सड़कों अखाड़े और रास मंडली के कलाकार अपने करतब का प्रदर्शन करते हुए चलते हैं १६ सागर पहुंच कर फूलडोल ठंडे करने की परंपरा को पूरा किया जाता है कोरोना के चलते इस बार परंपरा का क्रम टूट गया है फूलडोल से जुड़े सभी कार्यक्रमों को समाज के प्रमुख मंदिर किशनपुरा पर ही आयोजित किया गया है
काल भैरव बाबा को पहनाई जाएगी राजकीय पगड़ी
फूलडोल ग्यारस पर बाबा महाकाल के सेनापति काल भैरव की सवारी निकाली जाती है कोरोना संक्रमण के चलते इस बार सवारी स्थगित की गई है बाबा काल भैरव को सिंधिया राजघराने से आने वाली राजकीय पगड़ी शाम को पहनाई जाएगी जिलाधीश आशीष सिंह मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे सवारी की परंपरा में काल भैरव बाबा को पालकी में बिठाकर मंदिर के द्वार तक लाया जाएगा और वापस मंदिर में विराजित किया जाएगा काल भैरव की चरण पादुका को मंदिर के पुजारी सिद्धवट घाट लेकर पहुंचेंगे जहां पूजन अभिषेक के बाद चरण पादुका वापस मंदिर लाई जाए
गोपाल मंदिर मैं होंगे डोल के दर्शन
फूलडोल ग्यारस पर गोपाल मंदिर में आज दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक डोल के दर्शन सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कराए जाएंगे मंदिर में पूजा अर्चना के बाद डोल ग्यारस की परंपरा को निभाया जाएगा
बैरवा समाज का फूलडोल चल समारोह 105 साल बाद आज उज्जैन के मार्गो पर नहीं दिखाई देगा