दिल्ली : कम वोट प्रतिशत से भाजपा परेशान, 13 हजार बूथों से मंगवाया ब्यौरा











नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में पिछली बार के मुकाबले कम मतदान हुआ है। मतदाताओं की उदासीनता से राजनीतिक पार्टियां खासा परेशान हैं, विशेषकर मतदान का कम प्रतिशत भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गया है। शायद यही वजह है कि दिल्ली चुनाव नतीजों से पहले शनिवार देर रात तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिल्ली दफ्तर में बैठक चलती रही। बैठक में भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी, दिल्ली के चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर, प्रभारी नित्यानंद राय और कई नेता मौजूद थे। बैठक में दिल्ली की हर एक सीट की समीक्षा की गई।























दिल्ली में चुनाव खत्म होने के बाद सभी एग्जिट पोल में जहां आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने का दावा किया गया है, वही भाजपा नेता इसे लेकर पशोपेश में हैं। रविवार (9 फरवरी) तड़के तीन बजे तक चली बैठक में कम मतदान पर भी चर्चा हुई। पार्टी के कई नेताओं को लग रहा है कि मतदान में गिरावट की वजह मध्यम वर्ग की उदासीनता है। पार्टी को लगता है कि उसे इसका सीधा नुकसान होगा। क्योंकि मध्यमवर्ग भारतीय जनता पार्टी का कैडर रहा है। पिछले चुनाव में भाजपा को 33 फीसदी वोट मिले थे। पार्टी नेता मान रहे हैं कि शनिवार (8 फरवरी) को लोगों को घरों से निकालकर बूथों पर लाने में बहुत परेशानी हुई। पहले ही बूथ कार्यकतार्ओं को ज्यादा से ज्यादा मतदान कराने के लिए निर्देश दिए गए थे और सांसदों को उनके काम करने पर ध्यान रखने की हिदायत दी गई थी। बावजूद इसके पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार पांच फीसदी कम मतदान हुआ है। 


भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी के रणनीतिकार इस बात का विशेषण करने में जुटे हैं कि लोगों ने घरों के मालिकाना हक पर मतदान किया या फिर अरविंद केजरीवाल के मुफ्त पानी-बिजली योजना पर। इसी तरह से झुग्गी-झोपड़ी और स्लम क्षेत्रों में मतदान के दौरान महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा देखी गई।