मौत की सजा का सामना कर रहे दोषी मुकेश कुमार की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान उसकी वकील ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि घृणा अपराध से करें न कि अपराधी से। यह भी दावा किया गया कि दया याचिका पर विचार करते समय उसे एकांत में रखने सहित अन्य परिस्थितियों और प्रक्रियागत खामियों को नजरअंदाज किया गया। जस्टिस आर. भानुमति की अगुवाई में तीन न्यायधीशों की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। इस पर बेंच ने सवाल किया, 'आप कैसे कह सकते हैं कि ये तथ्य राष्ट्रपति महोदय के समक्ष नहीं रखे गए थे? आप यह कैसे कह सकते हैं कि राष्ट्रपति ने सही तरीके से विचार नहीं किया?'
दोषी के वकील ने जब यह कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारे तथ्य नहीं रखे गए थे तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारा रिकॉर्ड, साक्ष्य और फैसला पेश किया गया था। अंजना प्रकाश ने मौत की सजा के मामले में कई फैसलों और दया करने के राष्ट्रपति के अधिकार का हवाला दिया। उन्होने यह भी दलील दी कि राष्ट्रपति ने दुर्भावनापूर्ण, मनमाने और सामग्री के बगैर ही दया याचिका खारिज की। अंजना प्रकाश ने यह दावा भी किया कि 2012 के इस गैंगरेप केस में अन्य दोषी राम सिंह की जेल में हत्या कर दी गई थी लेकिन इसे आत्महत्या का मामला बताकर बंद कर दिया गया। गौरतलब है कि राम सिंह मार्च 2013 में जेल के भीतर फंदे पर लटका हुआ मिला था।