बाघों की पैर की गद्दी फट रही ठंड के कारण



पीलीभीत।  जंगल से बाहर सड़कों पर बाघ देखकर वाहन चालक तो खुद को काफी रोमांचित करते हैं, लेकिन खुद को जंगल से बाहर आकर असुरक्षित करना पड़ रहा। असल में पैरों में घाव होने से बाघ मजबूरी में बाहर का रास्ता देखते है। अधिक ठंड होने से बाघों के पैरों की गद्दी फटने लगती है। गद्दी में घाव होने से बाघ साफ जगह पर जाने का प्रयास करता है। बाघों की इस मजबूरी को देखते हुए डीडी ने कर्मियों को सघन रूप से पेट्रोलिंग के आदेश दिए हैं।















दिसंबर माह में शीतलहर चलने और पाला गिरने से मौसम काफी ठंडा हो गया था। इसका प्रभाव जहां इंसानों पर साफ तौर पर देखा गया तो जंगली जानवरों में भी ठंड से परेशानी हुई। यही कारण था कि लोगों को सड़क किनारे जंगल से बाहर बाघों के खूब दीदार हुए थे। अब मौसम सही होने के साथ ही बाघ दिखाई देने भी कम हो गए। ठंड में बाघों के जंगल से बाहर आने के पीछे एक खास कारण को अधिकारी खुद मान रहे है। अधिकारियों का तर्क है कि ठंड अधिक होने से जंगल में घास पर पाला जम जाने से बाघ के पैरों की गद्दी जो मुलायम होती है वह फट जाती है। गद्दी फटने से उसे घास में चलने में परेशानी होती है और उसके पैरों में घाव हो जाता है। ऐसे में बाघ साफ जमीन की तलाश में सड़क पर आ जाते हैं। बाघ इस स्थिति में पैरों को सुरक्षित करने के लिए साफ समतल जमीन को तलाश कर धूप में बैठते हैं। ठंड में बाघ के इस तरह से बाहर आने और पैरों में घाव होने से वह शिकार करने में भी तेजी नहीं ला पाता। इस दशा में उसे खतरा बढ़ जाता है। बाघों के इस तरह से बाहर आने पर डीडी ने उनकी और इंसानों  की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों में पेट्रोलिंग करने के आदेश दिए हैं।